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राष्ट्रीय एकीकरण और अंतर्राष्ट्रीय समझ के लिए शिक्षा

Author : सत्य नरायन यादव और सुरमल नार्वे

Abstract :

प्रस्तुत शोध पत्र "राष्ट्रीय एकीकरण और अंतर्राष्ट्रीय समझ के लिए शिक्षा" के विविध आयामों और वर्तमान समय में इसकी अपरिहार्यता का विश्लेषण करता है। वर्तमान २१वीं सदी के चुनौतीपूर्ण वैश्विक वातावरण में, जहाँ एक ओर संकीर्ण राष्ट्रवाद और सांप्रदायिकता जैसी चुनौतियाँ सिर उठा रही हैं, वहीं दूसरी ओर वैश्वीकरण ने पूरे विश्व को एक 'ग्लोबल विलेज' में बदल दिया है। ऐसे में शिक्षा ही वह एकमात्र सशक्त माध्यम है जो व्यक्ति के दृष्टिकोण को व्यापक बना सकती है। शोध के प्रथम चरण में राष्ट्रीय एकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। भारत जैसे बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी देश के लिए राष्ट्रीय एकता का अर्थ भौगोलिक सीमाओं से परे 'भावनात्मक एकता' है। यहाँ शिक्षा की भूमिका छात्रों के मन से भाषावाद, क्षेत्रवाद और जातिवाद के जहर को निकालकर उनमें "राष्ट्र प्रथम" की भावना विकसित करने की है। शिक्षक, पाठ्यक्रम और विद्यालयी गतिविधियों के माध्यम से विविधता में एकता के दर्शन को जीवंत बनाया जाता है। शोध के द्वितीय चरण में अंतर्राष्ट्रीय समझ की व्याख्या की गई है। परमाणु हथियारों और जलवायु परिवर्तन के इस युग में, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग अब केवल एक विकल्प नहीं बल्कि अस्तित्व की आवश्यकता है। भारतीय दर्शन का मूल मंत्र 'वसुधैव कुटुंबकम्' अंतर्राष्ट्रीयता का सर्वोत्तम आधार प्रदान करता है। शिक्षा के माध्यम से जब छात्र अन्य देशों की संस्कृतियों और समस्याओं को समझते हैं, तो उनमें सहिष्णुता और वैश्विक नागरिकता (Global Citizenship) का विकास होता है। राष्ट्रीय एकीकरण और अंतर्राष्ट्रीय समझ एक-दूसरे के पूरक हैं। एक व्यक्ति जो अपने देश की विविधता का सम्मान करना सीखता है, वही वैश्विक विविधता को स्वीकार करने के योग्य बनता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के संदर्भ में, शिक्षा का उद्देश्य ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है जो अपने देश के प्रति वफादार हों और साथ ही संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हों। अंततः, यह शोध पत्र स्पष्ट करता है कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए शिक्षा को "स्थानीय से वैश्विक" (Local to Global) के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए I

Keywords :

राष्ट्रीय एकीकरण, अंतर्राष्ट्रीय समझ, शिक्षक की भूमिका, भारतीय त्योहारों की भूमिका, वसुधैव कुटुंबकम् एवं शिक्षा I